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GeM Portal से बाहर क्यों गया SKMU का Tender? NCCF, Eligibility और Vendor Locking पर उठे बड़े सवाल

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GeM Portal से बाहर क्यों गया SKMU का Tender? NCCF, Eligibility और Vendor Locking पर उठे बड़े सवाल

दुमका स्थित सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (SKMU) इन दिनों अपने Exam Automation Tender को लेकर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी टेंडर प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है और Tender की शर्तें ऐसी बनाई गईं, जिससे केवल चुनिंदा एजेंसियों को फायदा पहुंचे।

 

 

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी खरीद के लिए बनाए गए GeM Portal (Government e-Marketplace) का उपयोग आखिर क्यों नहीं किया गया। सरकारी नियमों और पारदर्शिता की भावना के अनुसार अधिकतर खरीद प्रक्रिया GeM Portal के माध्यम से की जाती है, ताकि सभी योग्य कंपनियों को समान अवसर मिल सके। ऐसे में Exam Automation जैसी सेवा के लिए GeM से बाहर जाकर Tender जारी करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वर्षों से एक ही एजेंसी को लगातार Extension दिया जाता रहा। NCCF का नाम इस पूरे मामले में चर्चा के केंद्र में है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विश्वविद्यालय की प्रक्रिया ऐसी बनाई गई जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाए और अन्य कंपनियां शुरुआत में ही बाहर हो जाएं।

Tender की Eligibility शर्तों पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ शर्तें जैसे 300 करोड़ रुपये का वार्षिक Turnover, कई सरकारी विश्वविद्यालयों में पूर्व अनुभव और विभिन्न Certifications को लेकर विरोध दर्ज कराया गया है। आलोचकों का कहना है कि इतनी भारी शर्तें छोटे और मध्यम स्तर की योग्य कंपनियों को बाहर करने का माध्यम बन सकती हैं।

शिकायत में “Vendor Locking” जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप है कि पहले किसी एजेंसी को काम देकर बाद में उसी अनुभव को Eligibility बना दिया जाता है, जिससे वही एजेंसी आगे भी लाभ की स्थिति में बनी रहे।

विश्वविद्यालय परिसर में कुछ नामों को लेकर भी चर्चा तेज है। हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल पूछे जा रहे हैं और पारदर्शिता की मांग उठ रही है।

शिकायतकर्ताओं ने GFR 2017 और CVC Guidelines का हवाला देते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जरूरत पड़ने पर मामला अदालत और अन्य जांच एजेंसियों तक भी ले जाया जा सकता है।

हालांकि, इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जोहार न्यूज़ नहीं करता है। यह रिपोर्ट उपलब्ध शिकायतों, दस्तावेजों और लगाए गए आरोपों के आधार पर तैयार की गई है। यदि विश्वविद्यालय या संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखना चाहता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक सामान्य Tender प्रक्रिया थी, या फिर इसमें पारदर्शिता को लेकर वाकई गंभीर खामियां मौजूद हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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Author: joharnewslive

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